Wednesday, 16 March 2016
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अनुशासनहीनता, अराजकता* और अनैतिकता** के उन असंख्य अवशेषों*** को तेजस्वी प्रकाश में बदलने की शक्ति इस ब्रह्मांड की दिव्यता**** है समय और स्थ...
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कभी खामोश और कभी चीखती इस राह में एक ठहराव, एक शून्य सा है जो उपर उठता सा प्रतीत होता है जैसे हल्की सी, खाली सी ज़िन्दगी स्वयं ही तैरती जा ...
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Looking out of My window I see wonder; Cease to think of The distressing Evocation of The current Juncture. I lived a few Delightful Mom...
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आज फिर हुआ है युद्ध तर्क और सत्य में, आज फिर उठा है ज्वार समुन्द्र और शून्य में; इस तीव्र हलचल में फंसा है जीवन दीपक का, जो हर पल कांप कर...

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