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अनुशासनहीनता, अराजकता* और अनैतिकता** के उन असंख्य अवशेषों*** को तेजस्वी प्रकाश में बदलने की शक्ति इस ब्रह्मांड की दिव्यता**** है समय और स्थ...
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तेरा अस्ल ही है माज़ी तेरे वजूद का अपने तज़ब्ज़ुब की सियह क़लामी से इसे तू यूँ ही मौत का सामां न कर.... ............... माज़ी Past ...
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'अपने किरदार को मौसम से बचाकर रखना के फूलों में लौट कर कभी आती नहीं खुशबू।'
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दिल ओ' दिमाग की लड़ाई में सरहदों से फ़ासले हैं इसकी मानें तो आशिक उसकी कहें तो नाखुदा

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